पितृ लोक

जब तक यह चैतन्यमय ऊर्जा एक भौतिक सघन ऊर्जा से संपर्क में है वह उस दुसरे लोक के ऊर्जामय जगत से संपर्क भौतिक इन्द्रिय तंतुओ के माध्यम से संपर्क करने में असमर्थ आभास करती है, इस समय के उपरांत जब चेतना भौतिक ऊर्जा अर्थात पंचतत्वों से निर्मित शरीर के छदम आवरण से ऊपर उठती है तो अनंत जगत का आयाम में प्रवेश होने की क्रिया स्वाभाविक रूप से होने लगती है।शरीर की बाहरी जितनी इन्द्रियाँ हैं उनसे उस लोक से सम्पर्क साधना अयंत कठिन है अपितु दुसरे आयाम की इन्द्रियों के झंकारित होने से उनकी ध्वनि तरंगो से उस जगत तक प्रवेश करा जा सकता है।उसी प्रकार से उस जगत के अपने अलग तरंगद्धैर्य के अनंत आयाम है जिस से वह मनुष्यों की चेतना जगत के द्वार खटखटा सकते हैं।
इसी से मलते जुलते कई अनुभवो से ओतप्रोत हैं कई जीवन मेरे उसी में से एक यहाँ साझा करता हूँ-
एक मित्र की धर्मपत्नी को उनके पिता के मरणोपरांत उनको स्वप्न में और आभास में बहुत ही सूक्ष्म रूप में आभासित होते थे ,मेरे से यह वार्ता साझा हुई और मुझे निमंत्रण दिया गया इस समस्या से सम्बंधित निराकरण का और मैंने आश्वासन दे दिया ।जिस दिन का मैंने उनसे वादा करा उसी दिन प्रातः से ही मस्तिष्क में संकेत मिलने प्रारम्भ हो गए।जब मित्र के स्थान पे पहुंचा तो आभास हुआ की जिनके बारे में वार्ता हुई थी वह मौजूद हैं।
अब मैंने अपनी क्रिया प्रारंभ करी और मेरा उन के पिता की आत्मा से संपर्क सध गया और परिचय पूछा तो उन महिला का पिता होने का दावा करा गया अब क्युकी मैंने उनके पिता को कभी नहीं देखा था तो मैं नहीं जान सकता था की यह वाही आत्मा है या कोई छद्म ,तभी आभास हुआ की फ़ोटो मांग कर आश्वस्त हो जाता हु तभी विचार आया की हम तो समझते हैं यह जगत विशवास नहीं करता शायद कोई यह भी कह दे की फ़ोटो देख के तो कोई भी मानसिक छाया चित्र मानसपटल पे निर्मित कर ले तो मैंने उनसे फोटों मांगना उचित नहीं समझा और उसी आत्मा से कुछ विश्वास दिलाने के लिये पूछा तो उस आत्मा ने मुह खोल कर दांत दिखाए जिसमे ऊपर वाला एक दांत टूटा था ।मैंने यह सत्यापित करने हेतु उन महिला से प्रश्न करा की क्या आपके पिता का ऊपर वाला दांत टूटा था?
तब वह महिला फूट फूट के रोईं शायद उनको उनके पिता से लगाव के कारण उनकी उपस्थिति में भाव नहीं रुक पाये,फिर उनके पिता की आत्मा से काफी वार्ता हुई जिसमे उन्होंने उनकी इच्छाये जो बची रह गईं थी ,क्या क्या पसंद था उन्हें ,अब या करना चाहिए,कैसे मृत्यु हुई ,आगे कैसे यात्रा होगी इत्यादि सभी कुछ ।ऐसे बहुत ढेर सरे अनुभव बीच बीच में साझा करने का प्रयास करूँगा।

ज्योतिर्विद व ध्यान मार्गदर्शक पं. श्री तारामणि भाई जी
(ज्योतिषीय परामर्शक,ध्यान मार्गदर्शक,पारलौकिक रहस्यविद,मृतात्मा सम्पर्ककर्ता)
[इष्ट सिध्दि साधना,त्राटक साधना,यक्षिणी साधनाओ में सफलता हेतु संपर्क करे]
चामुंडा ज्योतिष केंद्र
9919935555
www.chamundajyotish.com

1 Comments

  1. Reply

    Hi, this is a comment.
    To delete a comment, just log in and view the post's comments. There you will have the option to edit or delete them.

Leave Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Chat Guru Ji via WhatsApp
error: Content is protected !!
%d bloggers like this: