गुरु शिष्य संबंध

  गर्मियों की झुलसा देने वाली धूप से भीगा हुआ शरीर ले एक दोपहर किसी प्रिय को #साधना मार्ग में आगे जाने हेतु “भगवान काल भैरव” कृपा से कुछ ज्ञानामृत बौछार कर वापस अपने स्थान पर छत से वायु फेंकते तीन संयुक्त पंखों की कृपा प्राप्ति से शरीर को शीतलता आभासित होते ही शांत चित्त…

अनुभव हो रहा कारण क्या है कृपया बताइये?

प्रश्न: गुरु जी आपके मार्गदर्शन में साधना कर रहा हूँ ……. यह अनुभव हो रहा कारण क्या है कृपया बताइये? उत्तर (श्री मणि भाई जी):आपकी सबसे बड़ी कमी साधना में आप बहुत ग्यानी हो और हर बाहरी ज्ञान से अपना घड़ा भरना चाहते हो,जो साधक की निशानी नहीं है।ये आपको मैंने कई बार इंगित करा…

क्या हम पागल से भी हो जाते हैं?

(एक साधक भाई का प्रश्न) प्रश्न: क्या हम पागल से भी हो जाते हैं? क्या अकेलापन अच्छा लगता है? उत्तर(श्री मणि भाई जी): जी पागलपन ही नहीं बाहरी जगत के लिए यह शान्ति शुरुआत में पागलपन से भी बढ़कर है।एक तो यह बात की हम स्वयं में इतने अशांत हैं भीतर से की अचानक से…

ध्यान लगने पर सासे लेना बन्ध क्यु हो जाता हे?

प्रश्न:गुरुजी जब मे ध्यान मे बेठता हु तो ध्यान लगने पर सासे लेना बन्ध हो जाता हे,ऐसा क्यु होता हे? उत्तर(श्री मणि भाई जी):नमन🙏 आपका प्रश्न ध्यान मे सांस लेना क्यों बंद हो जाता है, ऐसा आपको आभास में होता है क्योंकि आप उस समय उस एक क्षण में नही होते हैं ।जब जब आपका…

किसी ने मेरे पास आकर सांस ली

(हमारे whatsapp ग्रुप सदस्यों द्वारा किये जाने वाले प्रश्नों को आपके साथ साझा कर रहा हूँ) प्रश्न: आज ध्यान में ऐसा लगा जैसे किसी ने मेरे पास आकर सांस ली।मुझे पूरा महसूस हुआ। उत्तर(श्री मणि भाई जी):जय महाकाल प्रभु 🙏😊 जैसा मैंने पहले भी कहा हुआ है कि यदि यही अटकना है साधक को तो इन…

can sit on the chair too for meditation?

Question: Guru Shri Mani Bhai Ji Just another question..for meditation do we necessarily have to sit on the ground with cross legs or we can sit on the chair too? Answer:(श्री मणि भाई जी): For getting the meditation happened u need no rule to follow but u need to understand the game of your mind.…

साधना करते चलना

आज सुबह रजाई हटाई तो पैरों की जगह सीधे धड़ उतरने को आतुर हुआ तो पाया पैर अपने स्थान पे नहीं। ज्यादा ढूंढने की मशक्कत नहीं करनी पड़ी वो वही पड़े दिखे जहां कल टहल रहे थे और किसी गड्ढे में गिर पडे थे,वो पैर अभी तक उसी कीचड़ में खेल रहे थे।सहसा मुझे देख…

साधु व मर्यादा

एक सुबह दिल्ली के जिज्ञासुओ की मिलने की व्यस्तता में किसी मित्र के बहुत जोर देने में कारण एक व्यक्ति से बस 2 मिनट का मिलने का समय दिया वो भी बस सड़क पर कार का वेट करते हुये।उन महाशय ने मिलते ही शाब्दिक बमवर्षा शुरू कर दी कि ये आप सब ढोंग ढकोसला करते…

ईमानदार होना प्रथम आवश्यकता

स्व के लिए ईमानदार होना प्रथम आवश्यकता है ध्यानी साधक की।ईमानदारी से स्वीकार करना अत्यंत आवश्यक है।यदि 2 घंटे बैठ गए ध्यान के लिए और ध्यान घटित नही हो पाया तो पूर्ण ईमानदारी से स्वयं से कहिये नही हुआ।मन भ्रम में रखने का पूर्ण प्रयन्त करता है किंतु जब आप पूर्ण सत्यता व ईमानदारी से…

ये कैसा स्वाद है

एक शिष्य : प्रणाम गुरु जी 🙏 गुरु जी कभी कभी जब बहुत शांत होता हूँ तो मुह मे एक अलग स स्वाद आने लगता है बताना कठिन है की कैसा स्वाद होता है लेकिन सभी स्वादों से प्रीतिकर मालूम पड़ता है । तब अपने आप ही आंखे बंद होने को राजी हो जाती हैं |…

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