पितृ लोक

जब तक यह चैतन्यमय ऊर्जा एक भौतिक सघन ऊर्जा से संपर्क में है वह उस दुसरे लोक के ऊर्जामय जगत से संपर्क भौतिक इन्द्रिय तंतुओ के माध्यम से संपर्क करने में असमर्थ आभास करती है, इस समय के उपरांत जब चेतना भौतिक ऊर्जा अर्थात पंचतत्वों से निर्मित शरीर के छदम आवरण से ऊपर उठती है…

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