ये कैसा स्वाद है

एक शिष्य : प्रणाम गुरु जी ?
गुरु जी कभी कभी जब बहुत शांत होता हूँ तो मुह मे एक अलग स स्वाद आने लगता है बताना कठिन है की कैसा स्वाद होता है लेकिन सभी स्वादों से प्रीतिकर मालूम पड़ता है । तब अपने आप ही आंखे बंद होने को राजी हो जाती हैं |

Shri Taramani Bhai Ji : Good
पर आगे बढ़ो मत स्वाद चखो किसी भी बात का

शिष्य : नहीं गुरु जी मैं उस पर अटका नहीं रहता
बस पूछने का मन हुआ तो इसीलिए पूछा

Shri Taramani Bhai Ji : हमे लगता है कि हम नही अटके ,ये पूछने का आधार वही अनुभव है जो मन का लालच है जिसे वो चाह कर भी नही छोड़ सकता।मन ने इसी लिये धक्का दिया क्योंकि वो उसी पे खड़ा है अभी,आगे बढ़ गया होता तो यह न होता।आपको लगा आप अटके नही आगे बढ़ गए, ठीक ?पर मन तो वहीं खड़ा था न ?तभी तो हुआ न?वो भी आपके साथ आगे बढ़ गया होता तो ये न होता और जहां मन होता वहीं हम भी रहते हैं अर्थात ये भी मन की ही चालबाजी थी कि बाह्य रूप से तो यह आभासित करवा दूं कि तुम आगे चले गए पर मैं इस अनुभव को पुख्ता करवा लूं की आपको लग जाये कि हां आप सही जा रहे हो मुझे मारने की दिशा में…. किन्तु वो मैं करूँगा नही। आपको और हतोत्साहित करूँगा ताकि जो आपसे बात मुझ तक पहुंचाई जा रही है उसे साफ साफ बता दूं कि वो मुझे न टहला पायेगा इस बहकावे से और इस को भी नही पक्का करने दूंगा की कुछ भी हुआ सही था क्योंकि गुरु जी तो बड़े महान हो गए उन्होंने हां कर दिया तब क्या मन और पक्का हो गया । intelligent गुरु जी तो बोलते वाह वाह गजब अनुभव, पर ये घंटा गुरु ये क्या बकबक कर रहा साला घंटो जाप ध्यान इत्यादि करो ऊपर से कभी कभी अनुभव होता उसमे भी ये कहते अनुभव हो गया ये मानने नही दूंगा।
अब ऐसा न करना कि पूछने का मन हो और न पूछना ।जरूर पूछना क्योंकि जब वास्तविकता में कुछ घटेगा तो खुद से ही नही पूछ पाओगे ।

शिष्य : जी गुरु जी । क्षमा चाहेंगे । आप जो भी कहते हैं सीधे हृदय मे ही उतरता है इसलिए किसी और गुरु की तो बात ही मेरे खयाल मे कभी नहीं आती । कुछ भी होता है तो सर्वप्रथम आपका ही स्मरण मुझे आता है और कुछ नहीं भी होता है तो भी दुख होता है ये सोचकर की आपसे दूर क्यूँ हूँ मैं । बाकी आगे कह सक्ने मे असमर्थ हूँ, आप मेरा भाव समझ रहे होंगे । ये लिखते समय ये निकलते हुए आँसू गवाह है इसका|
Shri taramani bhai Ji: स्वाद व स्वाद की प्रीति बता तो देता पर बताना संभव नही है ।जो अनुभव है उस से आगे बढ़ते रहना हमेशा बस इसके पीछे के इशारे को समझ लेना बाकी सब अपने आप अपने समय पे होगा।

श्री तारामणि भाई जी
9919935555
ज्योतिर्विद व ध्यान मार्गदर्शक

www.chamundajyotish.com

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