ध्यान लगने पर सासे लेना बन्ध क्यु हो जाता हे?

प्रश्न:गुरुजी जब मे ध्यान मे बेठता हु तो ध्यान लगने पर सासे लेना बन्ध हो जाता हे,ऐसा क्यु होता हे?
उत्तर(श्री मणि भाई जी):नमन🙏
आपका प्रश्न ध्यान मे सांस लेना क्यों बंद हो जाता है, ऐसा आपको आभास में होता है क्योंकि आप उस समय उस एक क्षण में नही होते हैं ।जब जब आपका न होना ज्यादा पुष्ट होता जायेगा आपके होने के कई सबूत मिटते चले जायेंगे ,जैसे जैसे आपके मन से आपका छुटकारा मिलता जायेगा उस से सम्बंधित इंद्रियों के स्थूल विषयों में विस्तार होता जायेगा और सूक्ष्म के व्रहद जगत के अनुभव होने शुरू होते जायेंगे।जैसे मन के ध्यान में प्रवेश की यात्रा के एक पड़ाव पे घ्राण इंद्री के उसके विज्ञान में विस्तार हुआ और उस से गुजरते प्राण वायु के आभास में एक नया आयाम खुला की साँसों का आवागमन धीरे धीरे होते होते बिलकुल ही
न्यून हो गया और अचानक से ध्यान टूट गया क्यों की मन के एक तल पे ज्ञात है कि मैं तब हूँ जब सांस है और वो उस आयाम से बाहर।ऐसे कई सूक्ष्म विज्ञान अलग अलग केंद्रों से सम्बंधित खुलते हैं ध्यान में आगे बढ़ते हुए ,पर किसी भी अनुभव को होने दें। अपनी सीमा बढ़ाएं अनुभव को नकारने की,के हुआ और जाने दिया ,हुआ देखा जाने दिया ,इसको संजो के नहीं रखना है ऐसा कोई भी अनुभव आपको हमेशा अटकायेगा ।ये बहुत शुभ है पर अपने साथ होने दें ,अनुभव बहुत होंगे पर उनको होने दें देखे और आगे बढे बस।

महाकाल ध्यान संस्थान
श्री तारामणि भाई जी
9919935555
www.chamundajyotish.com

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